है मोल ही क्या कमज़ोरी का ?
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परिवर्तन
भुवना “जया ” बताती हैं कैसे परिवर्तन जीवन को गतिवान बनाता है |
इसलिये
क्यों लिखूं? क्या हो जायेगा?
बंद आँखों से…
केवल अतीत दिखता है ऐसा नहीं है।
मेरे बाद….
न हो….
अनोखी बारात
प्रतीक की शिवरात्रि पर अनोखी कविता…
क्या चुनोगे तुम?
इस पार या उस पार….
हो सके तो लौट आना…
यतिन “शेफ़्ता ” की कविता…
यह ध्यान रखना…
फीनिक्स हो तुम,..
शून्य
अगर फैलने की ठान ले……