समर की पहली कविता

चक्रव्ह्यु शत्रु नहीं, योद्धा की पहचान है|
चक्रव्ह्यु की गहनता ही, अभिमन्यु का मान है|

दो नदियाँ

भुवना जया बताती हैं उन दो नदियों के बारे में जो जीवन के अलग अलग पड़ावों का उनका आधार बनी, और फिर नदियों की ही तरह अपनी अपनी अनंत यात्राओं की ओर निकल गयीं।