अदीबा अपनी डायरी से एक गहरा भावनात्मक रिश्ता महसूस करती हैं। उनके लिए डायरी सिर्फ कागज़ के पन्ने नहीं, बल्कि एक ऐसा साथी है जो हर मुश्किल घड़ी में उनका साथ देता है…
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जंगल तारे रात चंद्रमा
चाँद हो पूरा, कभी अधूरा…
एक नदी की बात थी…
गुम्म गयी सब मिश्रियाँ…
सर्दियाँ और यादें…
रजनीश रंजन : सर्दियों की छवि में यादें, एहसास और जज़्बात…
नन्ही सी नादान
नदी की यात्रा में पहचान बनाने की चाह है, खुद के भीतर सम्मान और पूर्णता खोजने का संदेश है, जहां संघर्ष और आत्म-स्वीकृति का महत्व है।
तुम हो…
प्रियंका : नैनों की हर प्यास में तुम हो…
एक सवाल
आयुषी : ख़्वाहिशों में ऐसे मसरूफ हुए कि अब सोया नहीं करते…
प्रकाश एक प्रयास
दीपक की दिनकर से बात….
कम्फ़र्टर
अगली बार जब हम मिलें,…
तुम हो मेरे अंतर्मन में
अतिथि : तुम हो प्रकट आभास में..