फीनिक्स हो तुम,..
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शून्य
अगर फैलने की ठान ले……
ओ मेरे महान सपनों..
सपनों से सीखा मैंने- अंतर है स्वतंत्र होने में
और मुक्त होने में।
हम थिएटर क्यों करते हैं?
विकास गर्ग बताते हैं क्यों रंगमंच एक निरंतर यात्रा है…
अनुवाद आभार : शताब्दी मन्ना |
समर की पहली कविता
चक्रव्ह्यु शत्रु नहीं, योद्धा की पहचान है|
चक्रव्ह्यु की गहनता ही, अभिमन्यु का मान है|
अभिनेता की मृत्यु पर….
अभिनेता मरते नहीं हैं | बस एक मंच से दूसरे मंच चले जाते हैं ….
A lot can happen over …..
फ़न्ने खां द्वेदी इस गहन लेख में बताते हैं की क्या है जो खून के रंग जैसा है |
परी…..
एक परी के बारे में बताएं आपको?
दो नदियाँ
भुवना जया बताती हैं उन दो नदियों के बारे में जो जीवन के अलग अलग पड़ावों का उनका आधार बनी, और फिर नदियों की ही तरह अपनी अपनी अनंत यात्राओं की ओर निकल गयीं।
एक अदम्य जज़्बा “मिल्खा” ….
सरबजीत द्वारा मिल्खा जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि