दो नदियाँ

भुवना जया बताती हैं उन दो नदियों के बारे में जो जीवन के अलग अलग पड़ावों का उनका आधार बनी, और फिर नदियों की ही तरह अपनी अपनी अनंत यात्राओं की ओर निकल गयीं।