तू ही..

तू ख्याल है जहान का,
सूत्र है विश्वास का,
तू कर्म है महान सा. 
रूह है भगवान का |

भरता है जब तू झोली, 
संग लाता है खुशियों की टोली;
अंजान मनमस्त तेरी बोली,
सब खेले आंख मिचोली |

नासमझ सब समझे तुझे,
स्वयं करतब करे नासमझी के;
तू सोये तो मन बुझे, 
याद तब आते लम्हे नींद के |

तू सजता है हर रंग में, 
खिलखिलाता है हर ढंग में;
ना भेद करता किसी के स्नेह में, 
विजय पाता हर जंग में |

तुझे आस्था है उस पर, 
जो देखे ममता से तन पर;
मासूम भोला सब कहें, 
स्नेह लुटाता हर धर्म और जाति पर |

हर वस्तु स्वादिष्ट लगे, 
कदापि मिर्च ज़बान ठगे;
भूले तेरी चहकने से जगे. 
मीठा देने वाले बने सगे |

क्या-क्या सीखा तेरी बातों से, 
बखान करते ही विस्मृत हो जाता हूं;
प्रेम ही धर्म ऊंचा है सबसे,
अहम् से बड़ा होना व्यर्थ पाता हूं |

~विजय छाबड़ा~

विजय एक ख़ुशक़िस्मत इंसान हैं जो महत्वाकांक्षी एवं कार्यरत हैं | महफिल तथा संगीत से अपार प्रेम है और आशावादी दृष्टिकोण से समाज समझते हैं |

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