आसमान की ऊँचाइयों को चुनने का जुनून है?
क्या दुनिया की हर सल्तनत को अपना बना ने का फितूर है?
ख़ामोशियों को खुश कर,
सारी बंदिशों को तोड़,
हवा से तेज बनकर,
अपने हौसलों को तू बुलंद कर।
अब देखो यारो कहां मैं?
जरा ऊंची करो तुम अपनी नजर।
सारी जिंदगी कामयाब के लिए कुर्बान की,
भूल सा गया था कि मेरी भी अपनी एक पहचान थी।
पहले रूठा था मेरी जिंदगी से,
अब दोस्ती करनी है कामयाब से।
खोया सा रहता था काली घनी रातो में,
परेशान किया खूब उन ख्यालो ने,
अब ख़ामोशी की जगह ले ली है जुनूनी तूफान ने…
~तपस्या ~
नमस्ते ! मैं तपस्या, छोटे से शहर की एक आम लड़की, लिखना मैंने पिछले साल शुरू किया, और ये मेरी पूरी जिंदगी का सबसे अच्छा फैसला था। कविताओं ने मुझे एक पहचान दी है जो मेरे लिए काफ़ी एहमियत रखती है।
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