एक अदम्य जज़्बा “मिल्खा” ….

मिल्खा सिंह खेल जगत की वह प्रसिद्ध हस्ती हैं, जिनके बारे में मुझे काफ़ी देर से पता चला। यह मामला क्रिकेट के प्रसिद्ध खिलाड़ियों की तरह नहीं था। फ़िल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ देखने के बाद मैं मिल्खा सिंह जी के बारे में अधिक जान पाया |

एक सिख होने के नाते, जो बंटवारें के किस्से सुनता हुआ बड़ा हुआ है, मैं समझ सकता हूँ  उन्हें किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा होगा | लेकिन उन सभी प्रतिकूल परिस्थितिओं को परास्त कर, वे भारतीय एथलेटिक्स के ध्वजवाहक बन कर उभरे|  उनकी कहानी अदम्य जज़्बे और वीरता की कहानी है !

मिल्खा सिंह जी ने अपने सारे पदक (जो एक खिलाड़ी की सबसे बड़ी संपत्ति होते हैं !) , देश को श्रद्धांजलि स्वरुप दान कर दिए। वह ऐसे बड़े दिल वाले शख़्सियत थे । वह हर विपत्ति से लड़कर जीते। जब भी देश के प्रति कटिबद्धता दिखाने का अवसर आया, उन्होंने लहरों के विरुद्ध तैर कर दुनिया को चकित किया |

मिल्खा सिंह जी भारत के लिए ओलंपिक्स में स्वर्ण पदक देखना चाहते थे| इसी अधूरे सपने के साथ उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। मैं हमेशा चाहता था कि मेरा बच्चा भी इसी सपने को साकार करने कि ओर बढ़े| इसलिए नहीं कि ऐसा करने से वह कामयाब होगा बल्कि इसलिए कि  यही एक चीज़ है जो मैं मिल्खा सिंह जी जैसी शख़्सियत के लिए कर सकता हूँ। मुझे नहीं मालूम कि मेरे बच्चे में मिल्खा सिंह जी की तरह हवा से बातें करने का हुनर होगा या नहीं पर मुझ जैसे साधारण इंसान द्वारा लिखा गया यह यह छोटा सा लेख उनके प्रति मेरी श्रद्धांजलि है। और इससे भी बड़ी श्रद्धांजलि होगी देश के लिए ओलिंपिक खेलों में स्वर्ण पदक।

मेरी तमन्ना थी कि मिल्खा सिंह जी और अधिक जीवित रहते| मेरा पांच साल का बेटा  “अकाल रूप“ जो अभी से ही अपने ‘सरदार अंकल’ से इतना प्रभावित है, उन्हें वह बेहतरीन पल उपहार स्वरुप दे सकता। मिल्खा सिंह जी के जीवन ने जो यह मशाल मेरे बेटे में रौशन की है, मैं उसे कभी बुझने नहीं दूंगा। यह ओलंपिक की उस मशाल कि तरह है जो एक से दूसरे हाथ तक- पीढ़ी दर पीढ़ी तक बढ़ाई जाती है ताकि लौ हमेशा  जलती रहे। मैं अपने लिए अपने बच्चे से कुछ नहीं चाहता| पर मैं यह ज़रूर चाहता हूँ कि वह देश के लिए कुछ करे, जिस तरह मिल्खा जी ने किया | वे हर क्षण देश के लिए जिये। खेल से संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने देश के लिए यथा संभव योगदान दिया |

मिल्खा सिंह वह नाम है जो हर भारतीय को अनंत काल तक याद रहेगा।  मैं पूरी कोशिश करूँगा कि देश के लिए जो सुनहरा सपना मिल्खा सिंह जी ने देखा था, मेरे बेटे में उस सपने को पूरा करने की लौ जगमगाती रहे। अपने बच्चे में उनकी इसी भावना को ला पाना उनके प्रति मेरी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। इस तरह मिल्खा सिंह जी उन करोड़ों भारतीयों दिलों में जीवित रहेंगे जिनका प्रतिनिधत्व उन्होंने वैश्विक मंचो पर किया….

~सरबजीत सिंह ढींगरा~

सरबजीत को कार चलाना, तैराकी और सपनों को पूरा करना अच्छा लगता है| ख़राब से ख़राब चुटकुले को हास्यास्पद बना देना उनका विशेष गुण है | दिलचस्प बात यह है कि वे कभी कभी हास्यपद चुटकुले को भी ख़राब कर पाने में सक्षम हैं ! जज्बे, उमंग और कद में हमेशा ऊचें, उनके समीप रहने पर कोई भी क्षण आप उबाऊ नहीं पाएंगे| दिल से बच्चे, मन से जिज्ञासु और लक्ष्य प्राप्ति के प्रति सदैव अडिग, आप उन्हें sarabjeet.dhingra@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं|

लेख का मूल रूप अंग्रेजी में पढने के लिए यहाँ क्लिक करें |
हिंदी रूपांतरण : विकास गर्ग    

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