जंगल तारे रात चंद्रमा

Crescent moon illuminates a misty forest with fireflies dancing over a winding stream.

मैं लिखूँगा
जंगल तारे
तुम लिख देना
रात चंद्रमा…

जुगनू झिंगुर
गीले पातर
हवा के झोंके
नीली चादर…

चाँद हो पूरा
कभी अधूरा
कभी हकीक़त
ख़्वाब हो पूरा…

टिमटिम तारे
चाँद की उलझन
जंगल वीरां
डरती धड़कन।

कदम हैं चलते
सिसक सिसकते
आगे बढ़ते
पीछे छपते…

वक़्त का दलदल
याद का चोगा
बिलख बिलख के
रात का रोना…

कौन पढ़ेगा
ऐसी कविता
कौन सुनेगा
ऐसी कविता…

जो थोड़ी सी
हो तेरे सी
जो थोड़ी सी
हो मेरी भी।

मैं लिखूँगा
जंगल तारे
तुम लिख देना
रात चंद्रमा…

~तनय “समर”~

समर भीड़ में उलझा हुआ एक चेहरा है |

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