एक फ़ितूर..

है राह कड़ी ये शूलों सी,
बिछुड़ते मुरझाये फूलों की,
हँसते रुलाते झूलों की,
जग के बावलेपन में,
मेरी बात बांधे रखना-
एक फ़ितूर पाले रखना|

हों लाख तूफ़ान हर दिशा से आते,
फ़ितूर लंगर बन जायेगा;
पतझड़ वीरान निराशा में,
यही वसंत बहार लाएगा|
इसका दामन भींच के थामे रखना –
एक फ़ितूर पाले रखना|

हंसेगा जग शायद,
वह तो सब पर ही हँसता है,
“पागल! सनकी! जुनूनी!”
कसीदे तो सब पर ही कसता है-
ताने सुनते सुनते, धीर धारे रखना-
एक फ़ितूर पाले रखना|

सुनामियों भूचालों से,
कहाँ कोई बच पाता है?
बचता जो उसको-सब उजड़ा उजड़ा ही पाता है|
तब जूनून सुकून बन जाता है,
ज़ख्म कहाँ समझ कोई आता है?
उथल- पुथल की गहमागहमी,
सियासतों की बदमज़गी,
युद्ध हुंकार! विजय विलाप!
मन के नागासाकी में-
“नया जापान” झिलमिलाये रखना|
एक फ़ितूर पाले रखना…
एक फ़ितूर पाले रखना…

~Team GoodWill~

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