एक सवाल

आज वक़्त ने पूछ ही लिया मुझसे
क्या तुझे अपना बचपन याद नहीं आता ?

कैसे कह दूँ उसे कि
ख़्वाहिशों में ऐसे मसरूफ हुए कि अब सोया नहीं करते…

कैसे बता दूँ कि
वक़्त के साथ बढ़ती जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ा नहीं करते…

कैसे बताएँ कि
जिंदगी के इम्तेहान से आसान स्कूल के इम्तेहान होते थे…

कैसे बताएँ कि
बच्चों के बचपन में, हम कहीं खुद को तलाशा करते है …

कैसे बताएँ कि
पहले जैसे त्यौहार का इंतजार अब नहीं किया करते…

कैसे कह दूँ कि
हर जिद्द मनवाने वाली अब जिद्द किया नहीं करती …

कैसे कहूँ कि
मकान आज भी वही है पर अब वो घर सा नहीं हैं …

कैसे बताएं कि
लाखों के भीड़ में भी हम अकेला महसूस किया करते हैं …

कैसे बताएं कि
वो बचपन के दोस्त अब मिला नहीं करते…

ऐ वक्त तुझे इतना बताना चाहते हैं कि,
जिंदगी के भाग दौड़ में इतने उलझे हैं कि
बचपन को अब सिर्फ याद कर मुस्कुरा दिया करते हैं
तो कभी आँखें को नम कर लिया करते हैं |

~आयुषी सिंह ~

आयुषी 27 साल की हैं। वह छत्तीसगढ़ के एक छोटे से शहर मनेंद्रगढ़ की रहने वाली हैं। आप पेशे से अध्यापक हैं। आयुषी को पहले से ही स्केचिंग और कहानियां-कविता लिखने का शौक था, लेकिन अब लेखन की दुनिया में यह उनका पहला कदम है। आयुषी का मानना ​​है कि अपने विचारों, अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक माध्यम की जरूरत होती है और इसके लिए यह माध्यम बना लेखन|

अगर आपको उचित लगे तो इस लेख को लाइक और इसपर कमेन्ट करें | अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों से साझा करें | The GoodWill Blog को follow करें ! मुस्कुराते रहें |

अगर आप भी लिखना चाहते हैं The GoodWill Blog पर तो हमें ईमेल करें : blogthegoodwill@gmail.com/ publish@thegoodwillblog.in

https://www.facebook.com/thegoodwillblog : Facebook
https://www.instagram.com/blogthegoodwill/ : Instagram
https://twitter.com/GoodWillBlog : Twitter

Leave a comment