आसमान पे आशियाना



जमीन खिसकने की तैयारी कर रही हैं,
तो तुम भी आसमान पे आशियाना बनाने की सोचो|
अपने अच्छे दिनों के लिए  
थोड़े बुरे दिन भी तो देखो|

जो मंजिल तुमने देखी है, दूर हैं थोड़ी
जो सपने बुने हैं, है अपनी मंजिल की ओर
उनको सीढी़ बना के चढ़ना तो शुरू करो,  
ज़मीन खिसक रही है तो आसमान पे
आशियाना बनाने की तो सोचो  

तेरी मंजिल की ओर बढ़ते हर कदम की तैयारी, 
कुछ इस  तरह कर की मंजिल दूर न हो सके, 
बहुत घमंड हैं दरिया को उसमे पानी होने का, 
अपनी प्यास इतनी रखो कि उसके पानी से भी ना मिटे सके|

आसमान झुकने को मजबूर हो जाए तेरे आगे,
तू अपने कदम इतने  भारी तो कर,  
इस जमीन से छलांग लगा अब- 
तू आसमान पे आशियाने की तैयारी तो कर… 
आसमान पे आशियाने की तैयारी तो कर…

~Friend’s Writer~

Friend's Writer को लिखने का शौक़ है |  

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