मसूरी…

तुम आना, और अपने साथ मसूरी ले आना
वो हल्की सी ठंड, वो हल्की सी धुँध समेट लाना।

गनहिल से भुट्टे के दाने,
मॉल रोड से चाय की चुस्की ले आना।

कैम्प्टी फॉल से गिरते झरने की आवाज़,
और उसकी बूंदों की ठंडक ले आना ।

शाम ढले, तुम सनसेट पॉइंट पर जाना,
डूबते सूरज, और उभरती दून की टिमटिमा रही बत्तियाँ ले आना ।

और सुनो, पहाड़ के उस कोने से,
हमने जो साथ लगाये थे,
उन ठहाकों की गूंज भी लेते आना

तुम आना, और अपने साथ मसूरी ले आना …….

(विश्व पर्यटन दिवस-27 सितम्बर पर विशेष प्रस्तुति )

~रोहित गोयल~

रोहित की पहली पुस्तक "Fall, Don’t Fail” कुछ महीनों पहले बेस्ट सेलर की श्रेणी  में शामिल हुई थी।  ये पुस्तक जीवन की वास्तविक घटनाओं पर आधारित है जिसमे बड़ी कंपनी की कार्यशैली पर एक आंतरिक दृष्टि कोण मिलता है। जब कंपनी छंटनी करती है तो उसमे काम कर रहे लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसका मार्मिक विवरण पढ़ने को मिलता है। 
रोहित कवितायेँ और लघु कथाएं लिखने में रूचि रखते हैं। अभी वे अपने काव्य संग्रह और अगले उपन्यास पर कार्य कर रहे हैं।

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